शनिवार, 10 दिसम्बर 2011

आज के विषय पर्व के हाइकु प्रेषित कर रही हूँ -

१. चुप खड़े हैं
रात - दिन बन के
नए सवाल .

२ . रजनी बाला
तारों के फूल लगा
ढूँढें चाँद को .

३ . खामोशी में
महकी रातरानी
बिछड़े मिले .

४. आतंकी रात
धरती करी लाल
मांगे जवाब .

५. जमाना चुप
चमन उजाड़ के
आहें दे गया .

६ .खामोश अदा
बढ़ाती है फासला
देती है सजा .

७ . घायल रात
तड़पाती मुझ को
जख्म भर जा .

८. अमावस्या में
सनम लगते हो
पूनो का चाँद .

९. प्रातः होते ही
चाँद गायब हुआ
ख़्वाब दे गया .

१०. गले मिल के
खामोशी जुदा हुई
करार कर .

११. जुदा घड़ी में
रात करवटें लें
यादें छलकें .

१२ . पूनो का चाँद
चमके आकाश में
राजा - सा लगे .

१३ . खामोशियों में
इश्क की बाढ़ आई
डूबा -डूबा के .

१४ . आदत डाली
क्यों मौन रहने की
मौत लगती .

मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुम्बई .
भारत .
आज की शाम नव रूप में सजी करके हाइकू श्रृंगार प्रेषित करती नव उदगार -

१ . हाइकु राग
श्रृंगार - सा आइना
चंदन लगे .

२ . चंदन वन
जहरीले साँपों का
पनाहगार .

३ . ज्वाला विष की
हरे शीतलता से
मित्र चंदन .

४ . चंदन घिस
वेलपत्र सजाऊं
' पी ' पै चढाऊं .

५ . प्रेम चंदन
विषधरों ने चूमा
मुरीद हुए .

६ . हार श्रृंगार
किया है हजारों का
देखा न ' पी ' ने .

७ .करना है क्या
जग राग करके
सब है झूठा .

८ . दर्पण टूटा
निहारा जब रूप
रोग है लगा .

९ . लगे चंदन
शीतल होवे अंग
औषधि न्यारी

१० . भोर की लाली
बन सिंदूर मांग की
सुहागन की .

११ . उगता रवि
लगे नारी की बिंदी
अजब प्यारी .

मंजु गुप्ता

वाशी
नवी मुम्बई
भारत .
हाइकु पर्व पर विशेष -

१. खबर ताजा
पेट्रोल फिर बढ़ा
विवश सत्ता .

२ . मजबूर माँ
बेचा अजन्मा बच्चा
लाचार कोख .

३. कालाबाजारी
दुकान पीढ़ियों की
सदा आबाद .

४. हमारा नारा -
" मजबूत राष्ट्र हो "
मिले सहारा .

५ . होर्डिंग गिरा
स्कूली बच्चा मरा
अव्यवस्थाएं .

६. अब वोट दो
इन्टरनेट पर
चिंतित लोग .

७. रेल विभाग
कोहरे में लिपटा
रेले हैं रद्द .

८. कासाब मस्त
खर्च हुए करोड़ों
जनता पस्त .

९ . माया की माया
हाथी -पुतले बढ़े
टी.वी . दिखाए .

१० . छाया कोहरा
रेल है टकराई
रोया है रिश्ता .

मंजु गुप्ता
वाशी ,
नवी मुम्बई
भारत .
हाइकू लिखें हैं

साहित्यिक, सामाजिक ,प्राकृतिकऔर राजनीति के रंगों का प्रयोग किया ,कितना किसको रंगता है हाइकु ' सप्ताह '

१ . उठी कलम
लिख रही सनम
आँखें हैं नम .

२ . रची कविता
तुम हो हर शब्द
बना है काव्य .

३ . बहारे हुस्न
छाए ख्यालों में तुम
खो गए हम .

४ . वसंत आया
गुँजार भँवरों का
यादों को लाया .

५. दिए हैं गम
दिल में पड़े जख्म
निकले दम .

६ . . दम मूल्यों में
अपनाया जिसने
महान बने .

७. ख़ुदकुशी से
किसान रहे मर
सत्ता विफल .

८. आबादी बढ़ी
महंगाई न रुकी
कीमतें चढ़ी .

९ . अन्ना की आँधी
दूसरा बना गाँधी
सरकार डरी .

१० . होली रंगों की
ऊँच - नीच मिटाती
मेल कराती .

११ . बन सवाल
खड़े हैं दिन रात
क्या दें जवाब .

१२ . शहर मेरे
बहुत दिनों बाद
निकला चाँद .

मंजु गुप्ता
वाशी ,
नवी मुंबई . भारत .

मंगलवार, 4 जनवरी 2011

नौवा सर्ग

नौवां सर्ग

२३ मार्च १९३१ को वह
हँसते - हँसते फाँसी पर झूला
बलिदान - त्याग में वह तपा
अपने कर्त्तव्यों को न भूला ।

मरने से पहले गाया खुद का गान
जज्बा था देश- प्रेम का महान
"दिल से न निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत,
मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी । "

किया था राष्ट्र का सपना पूरा
एकता - अखंडता का दीप जला
संस्कारों का परिचय है मिला
राष्ट्र- जग की नवचेतना बना ।

डर सत्ता को आंदोलन का था
टुकड़े - टुकड़े में उसे था बाँटा
बोरियों में उसे था भरवाया
फिरोजपुर में उसे पहुँचाया ।

जल्लाद हत्यारों ने उसे
देशी घी के बदले में
किरासन तेल में जलाया
धूं - धूं करके जलने लगे ।

जलती लपटों को देखकर
आए गाँववाले भागकर
अंग्रेजों ने उन से डर कर
भागे उसे सतुलज में फेंककर ।

गाँववालों का था वह दुलारा
मृत शरीर को किया इकट्ठा
छाती से उसे था लगाया
विधिवत किया संस्कार उसका ।

दुःख की घड़ी भारत पर आई
नींद हर भारतवासी की उड़ी
लिया हर क्रांतिकारी ने प्रण
देंगे गद्दारों को मौत का दंड ।

सोमवार, 3 जनवरी 2011

सर्ग बारहवां

सर्ग बारहवां

विदेशी दासता से कराया मुक्त
शहीदों में कर गए नाम प्रसिद्ध
विदेशीयों के नाक में किया दम था
गोरों के अत्याचारों से लिया बदला .

आओ गाएँ वंदन करें क्रांतिकारी का
आओ पूजे जय करें भगत सिंह की
मना रहा जग इनका शहीदी दिवस
ये भारत के सतवीर सपूत साहसी .

क्योंकि देश के लिए लाया सशस्त्र क्रांति
आँखों में थी जोश - उत्साह से भरी चमक
बलिदान - त्याग में महावीर वह तपा था
आजादी का परचम बन वह लहराया .

शहीदे आजम वीर भगत सिंह की जय
बलिदानी महावीर भगत सिंह को नमन
क्रांतिकारियों को संकट में किया एक
विविधता में एकता की मिसाल था वह ।





रविवार, 2 जनवरी 2011

ग्यारहवां सर्ग

ग्यारहवां सर्ग

खुशहाल क्रांति का बिगुल बजाया
गुजरे कल को आज में बदला
गुलामी की जंजीरों को तोड़ा
आजादी का वह रखवाला था .

जय - जय के जयगानों से
क्रांति की जयमाला पहनाते
अपने प्राणों की ज्वाला से
संदेशा आजादी का गया दे .

भारत माँ उसकी आभारी
महकी आजादी की क्यारी
धन्य - धन्य हुए भारतवासी
देते हैं तुम्हें सब सलामी .

अमर हो गया क्रांतिकारी
उजड़ी माँ की कोख प्यारी
शहादत थी आजादी की
जय बोलो वीर भगत सिंह की .

स्वयंवर आजादी का रचा गया
इतिहास का पन्ना सजा गया
चुनौतियों को गले लगा लिया
भारत माँ का ऋण चुका गया .

माँ को दी थी जुबान
देश का महाप्रहरी बन
दे दिए अपने प्राण
आजादी का साथी बन .

अधर्मी शासकों को जता गया
कायरों को धर्म बता गया
अन्याय - बुराई बता गया
आजादी की राह बना गया .

महारथी शूरवीर भगत
दे गया धर्म की दुहाई
दे गया सच की सच्चाई
बताया क्रांति से आजादी .

कर्त्तव्य कर दिखलाया
कर्त्तव्य प्यार से है बड़ा
मानचित्र पर अमर हो गया
देश को उदास कर गया .

स्वाभिमान बता गया
देश - प्रेम-भक्ति दर्शा गया
फिरंगियों को जवाब दे गया
स्वाधीनता का पाठ पढ़ा गया .

जननी का गौरव बढ़ा गया

बहादुरी की मिसाल बन गया

क्रांति का बीज बो गया

देशवासियों को प्रेरणा दे गया .

जीवन जग में सफल कर गया

क्रांति की चिनगारियाँ बन

गोरों का महल ढहा गया

चालों को परास्त कर गया .

गुलामी को आजादी दे गया

भारत माँ का नव प्रभात बन

ईद , बैसाखी , दिवाली ,होली बन

अमर जवानी आजादी को दे गया .