गुरुवार, 20 नवंबर 2014

शादी की साल गिरह आ गई फिर एक बार 

सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .

सजे हैं घर , नगर के गलियारे

सजे हैं सोलह श्रृंगार सारे .

लाली सुहाग ने किया करार 

खिलेगी सिंदूर से सदा बहार .


शादी की साल गिरह आ गई फिर एक बार 

सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .


टीका , बिंदिया पी से हुए निहाल 

घटा का काजल इश्क का कहे हाल . 

प्रीत गजरा महका रहा खुमार 

धड़कनें धड़के ले के पयार 

शादी की साल गिरह आ गई फिर एक बार 

सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .

लाली लवों की करे लालमलाल 

हिना ने रंग दिए दिल लाल लाल .

नग अँगूठी में दिखे पी की मुरत 

प्रेम नगर में रंगी आज कुदरत .

खन खन चुड़ियां मिलन का करें शोर 

पायल , बिछया पर चले न जोर .

जश्ने इश्क का मंजु हुआ इजहार 

दुलारी दुआएँ गाए दिलदार .

बुधवार, 13 अगस्त 2014

त्रिवेणी: इन्द्रधनुषी राखी

त्रिवेणी: इन्द्रधनु


मुझे भी सभी के सेदोको उत्कृष्ट लगे .

अभी का आभार .

सोमवार, 28 अप्रैल 2014

दोहों में मजदूर




                  दोहों में मजदूर       


जगत में  ' मजदूर दिवस ' , एक मई को होय . 

ऑफिसों - फैक्टरियों  में , मिले छुट्टी हर कोय .


अनपढ़ हुए तो क्या हुआ , करते परिश्रम खूब . 

सर्दी , गर्मी , वर्षा ऋतु  में , काम में रहते डूब .


श्रम  से ना  दम फूलता , आता खूब स्वेद .

दिन - रात परिश्रम  करके , भरते अपना पेट .


मानसिक - शारीरिक श्रम,  में करे राष्ट्र भेद .

है श्रमिक का कम वेतन ,  ' मंजू ' होता खेद .


नहीं है  सिर ढकने का  , स्थल  भी  उनके पास .

बनाय  औरों के लिए , घर , भवन , शहर खास .  


न हो अगर संसार में , कोई भी मजदूर .

तो न होते महल - नगर , न ही  ' ताज ' - सा नूर .



 नहीं मिलती उन्हें इज्जत , न मिले हैं   पुरस्कार . 

ना ही हैं वस्त्र - आवास , ना आहार -  विहार . 


तन  - मन  का  गम भुलाने , पिए लेता  शराब .

बर्बाद होता परिवार , बेचे जो सरकार .


करते  ' बाल -  मजदूरी ' , सहते  धुआँ - दुर्गंध .

बनाते धूप -  अगरबत्ती ,  करें जग में सुगंध . 


दुकान  , ढाबा , घरों में , करें  हैं बच्चे काम . 

बचपन बूढा हो जाय ,  होय  देश बदनाम  .


करे जग इनका शोषण , मिलती गाली - मार .

छुट्टी पर काटे पगार , होते जब बीमार . 


भटकते  हैं इधर -उधर , होय  कुसंग शिकार .

माफिया , डाकू बन के , करें हैं बलात्कार . 


जीने के लिए करते , हाड़ - तोड़ वे काम .

ना  मिलता   शिक्षा - इलाज  , होते  वे लाचार . 


बन्धुआ मजदूर बन के , चुकाते हैं लगान .

मानवता का हो रहा ,खुला घोर अपमान .


समस्या के लिए हल हो ,  ' बन्धुआ मुक्ति अभियान '
 
पुनर्वास की हो व्यवस्था , बने कठोर विधान . 



नैतिकता -  राष्ट्र हित में ,  सरकार होय ध्यान . 

दे घर , स्कूल , सुविधाएं , राज्य बढ़ाए हाथ . 

शनिवार, 21 सितंबर 2013

नई सुबह की आशीषें

प्यारी लाडली लवली 

असीम अपरिमित अनंत प्यार .


पर्वों का पर्वराज वर्षगांठ की सुनहरी पावन तारीख २१ सितबर के स्वर्णिम सुअवसर पर परिवार - समाज जग की ओर से प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष 

रूप से जुड़े जन - मन की ओर से  हार्दिक बधाई प्रेषित कर रही हूँ .

शब्दों को गूँथ कर उपहार गजल का प्रेषित कर रही हूँ .

नई सुबह की आशीषें 

षोडशोपचार गाती नई सुबह आई 

पर्व जन्म दिन मनाने माँ - पिता शुचि आई . 

स्वागत में नवरंग - रस से शुभ दिन सजा 

नभ ने भी आशीषों की झड़ी लगाई .

महके जीवन का पल - पल खुशियों से 

रहेगी सदा साथ ममता कई परछाई . 

निवाए हाथों से जब खिलाती बचपन 

अनुगूँज किलकारियां दूर करे तन्हाई .

नहीं आय ककहरा सिखाती कई बार 

बनी डॉक्टर लिए शिक्षा की गहराई . 

सुनहरी रश्मियाँ दुआओं के शहर में 

ऊँचाइयां उजाले की लेकर आई .

लिए प्रेम रंग चाहत रंगने आया 

सिंधु आरजू में चम्पई मुस्कान छाई .

अनुराग को इक दिन बिछडना पड़ता

लिखते - लिखते आँखें आज छलछलाई .

वर्षा रहा ढेर आशीर्वाद हर वरद हस्त 

' मंजु '  ' सदा सुखी रहो ' गाए शाहनाई . 

अनंत मंगल कामनाओं के साथ - 

माँ 

गुरुवार, 29 अगस्त 2013

जन्माष्टमी - लीलाधर की महालीलाएं






जन्माष्टमी  की हार्दिक शुभकामानाएं

लीलाधर  की    महालीलाएं 

१. कृष्ण जन्म पै 

जागे जग के भाग्य 

करूँ कामना .

२. जन्माष्टमी पै 

हर घर - विश्व में

गूंजी बधाई .

३. प्रेम मंदिर 

 में आस्था का उमड़ा

जन सैलाब  . 

४. कृष्ण प्रेम में 

वर्ण , धर्म , नस्ल की 

सीमाएं टूटी .

५. देश - विदेश 

कान्हा  रंग में रंगे 

जन्मोत्सव पै .

६. कारा  में  कृष्ण 

तोड़ी जुल्मी बेडियाँ 

चमत्कार से . 

७. कान्हा पग छु 

यमुना ने दी राह 

वासुदेवको .

८. छली पूतना 

 ने  जान थी गवाईं

कृष्ण लीला  से 

९. सुदामा पग
 
  कान्हा आंसुओं से  धो  

मैत्री थी गूंजी .

१० . वंशीधर से 

मांगा अधरामृत 

हर  गोपी ने 

११. प्रेम वेदी पै 

किया था आत्मदाह 

सारी गोपी ने .

१२ दिव्य दृष्टि  से 

अंतर घर गईं

प्रेमी  गोपियाँ . 

१३. गोकुलधाम 

में रची बाल लीला 

घनश्याम ने .  

१४. श्याम लीला से  

अधर्म पै धर्म का 

झंडा फहरा . 

१५ . अनोखे रास 

गोपियों से करके 

दिलों को जोड़ा . 

१६ . प्रेम - भक्ति से 

कान्हा हुए वैश्विक 

अनंत हो के . 

१७ . आतंकी कंस 

की चालों का  मर्दन 

किया खेल में . 

१८ . कृष्ण नकेल 

से कालिया से मुक्त 

हुई यमुना . 

 १९ . महाराष्ट्र में 

दही कालाउत्सव 

की मची धूम .

२० . बनाने आए 
 
पिरामिड कान्हा का 

विदेशी  टोली  .

२१ . चितचोर की 

मधुर तानों पर 

नाचे गोपियाँ . 

 २२ . कृष्ण शिक्षा से 

पट उर के खुलें 

होए उद्धार .   

 

बुधवार, 31 जुलाई 2013

मैत्री के रंगों की होली २८ . २ . २०१०

मैत्री के रंगों की होली

उड़ा अबीर मला गुलाल ,
हुआ सारा जग लालम लाल
गुजिया , मठरी की बहार ,
स्नेह-मिलन का है त्योहार .

आई है रंगों की होली ,
छुट्टी विद्यालय में हो ली ,
निकली घर से बच्चों की टोली ,
लिए हाथ रंगों की थैली.

लाल - हरे-गुलाबी-नीले,
कितने देखो रंग चमकीले
पिंकी शिंकी आशु राजु
सारे बच्चे आजु-बाजु

रंगों की भर-भर पिचकारी
सबनें इक दूजे पे मारी
रंग गए हैं सबके कपडे
लाल-गुलाल भरे हैं चेहरे

शिंकी पूछे आशु से ,
पिंकी! राजू हैं कौन से ?,
नहीं पहचान में आ रहे,
मैत्री के रंगों से रंगे हुए .

जग में सबको मित्र बनाएं ,
आपस में न लडे-लड़ाएं,
मेरा-तेरा ,भेद भाव मिटाए
"मंजू "संदेश प्रेम का होली लाए

ईद मुबारक   २. ३ . २०१०

ईद पर्व इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से आता है । यह मुसलमानों का त्योहार है । विश्वभर में मुसलमान श्रद्धा
से इसे मनाते हैं । रमजान के अंत में यह आता है ।
रमजान का पूरा महीना आत्मशुद्धि ,व्रत ,रोजा रखने का होता है । दिन में बिना कुछ खाए - पिए रहकर पांच बार नमाज पढना रमजान का एक नियम होता है । रात को सूर्य अस्त के बाद खाना खाते हैं । जन - मन बड़े उत्साह , चाव के साथ मनाते हैं । बच्चे - बड़े सभी नए वस्त्र पहनते हैं । सर ढक कर ईदगाह नमाज अदा करते हैं . ईद के त्योहार में सब को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं ।
इस दिन घरों में विशेष पकवान जैसे मीठी सवेंया ,खीर, खुरमा बनता है । सब मिलकर खाते हैं । और ख़ुशी मनाते हैं । मिठाइयां बांटते हैं । बच्चों को ईदी में रुपए मिलते हैं ।
महीने के अंतिम दिन चाँद देख कर दूसरे दिन ईद का त्योहार मनाते हैं ।
बच्चों यह त्योहार इंसानियत का पैगाम देता है । सबके प्रति प्रेम - प्यार बांटने का संदेश देता है । अल्लाह भी तभी खुश होता है ,जब हम आपस में वैर -विरोध को त्याग मिलजुलकर रहें । तो मेरे प्यारे बच्चों आप भी अपने मन में भेद भाव न लाना और इंसानियत के रिश्ते को सदैव कायम रखना ।
आप सब को ईद मुबारक देती हूँ ।