गुरुवार, 29 अगस्त 2013

जन्माष्टमी - लीलाधर की महालीलाएं






जन्माष्टमी  की हार्दिक शुभकामानाएं

लीलाधर  की    महालीलाएं 

१. कृष्ण जन्म पै 

जागे जग के भाग्य 

करूँ कामना .

२. जन्माष्टमी पै 

हर घर - विश्व में

गूंजी बधाई .

३. प्रेम मंदिर 

 में आस्था का उमड़ा

जन सैलाब  . 

४. कृष्ण प्रेम में 

वर्ण , धर्म , नस्ल की 

सीमाएं टूटी .

५. देश - विदेश 

कान्हा  रंग में रंगे 

जन्मोत्सव पै .

६. कारा  में  कृष्ण 

तोड़ी जुल्मी बेडियाँ 

चमत्कार से . 

७. कान्हा पग छु 

यमुना ने दी राह 

वासुदेवको .

८. छली पूतना 

 ने  जान थी गवाईं

कृष्ण लीला  से 

९. सुदामा पग
 
  कान्हा आंसुओं से  धो  

मैत्री थी गूंजी .

१० . वंशीधर से 

मांगा अधरामृत 

हर  गोपी ने 

११. प्रेम वेदी पै 

किया था आत्मदाह 

सारी गोपी ने .

१२ दिव्य दृष्टि  से 

अंतर घर गईं

प्रेमी  गोपियाँ . 

१३. गोकुलधाम 

में रची बाल लीला 

घनश्याम ने .  

१४. श्याम लीला से  

अधर्म पै धर्म का 

झंडा फहरा . 

१५ . अनोखे रास 

गोपियों से करके 

दिलों को जोड़ा . 

१६ . प्रेम - भक्ति से 

कान्हा हुए वैश्विक 

अनंत हो के . 

१७ . आतंकी कंस 

की चालों का  मर्दन 

किया खेल में . 

१८ . कृष्ण नकेल 

से कालिया से मुक्त 

हुई यमुना . 

 १९ . महाराष्ट्र में 

दही कालाउत्सव 

की मची धूम .

२० . बनाने आए 
 
पिरामिड कान्हा का 

विदेशी  टोली  .

२१ . चितचोर की 

मधुर तानों पर 

नाचे गोपियाँ . 

 २२ . कृष्ण शिक्षा से 

पट उर के खुलें 

होए उद्धार .   

 

बुधवार, 31 जुलाई 2013

मैत्री के रंगों की होली २८ . २ . २०१०

मैत्री के रंगों की होली

उड़ा अबीर मला गुलाल ,
हुआ सारा जग लालम लाल
गुजिया , मठरी की बहार ,
स्नेह-मिलन का है त्योहार .

आई है रंगों की होली ,
छुट्टी विद्यालय में हो ली ,
निकली घर से बच्चों की टोली ,
लिए हाथ रंगों की थैली.

लाल - हरे-गुलाबी-नीले,
कितने देखो रंग चमकीले
पिंकी शिंकी आशु राजु
सारे बच्चे आजु-बाजु

रंगों की भर-भर पिचकारी
सबनें इक दूजे पे मारी
रंग गए हैं सबके कपडे
लाल-गुलाल भरे हैं चेहरे

शिंकी पूछे आशु से ,
पिंकी! राजू हैं कौन से ?,
नहीं पहचान में आ रहे,
मैत्री के रंगों से रंगे हुए .

जग में सबको मित्र बनाएं ,
आपस में न लडे-लड़ाएं,
मेरा-तेरा ,भेद भाव मिटाए
"मंजू "संदेश प्रेम का होली लाए

ईद मुबारक   २. ३ . २०१०

ईद पर्व इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से आता है । यह मुसलमानों का त्योहार है । विश्वभर में मुसलमान श्रद्धा
से इसे मनाते हैं । रमजान के अंत में यह आता है ।
रमजान का पूरा महीना आत्मशुद्धि ,व्रत ,रोजा रखने का होता है । दिन में बिना कुछ खाए - पिए रहकर पांच बार नमाज पढना रमजान का एक नियम होता है । रात को सूर्य अस्त के बाद खाना खाते हैं । जन - मन बड़े उत्साह , चाव के साथ मनाते हैं । बच्चे - बड़े सभी नए वस्त्र पहनते हैं । सर ढक कर ईदगाह नमाज अदा करते हैं . ईद के त्योहार में सब को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं ।
इस दिन घरों में विशेष पकवान जैसे मीठी सवेंया ,खीर, खुरमा बनता है । सब मिलकर खाते हैं । और ख़ुशी मनाते हैं । मिठाइयां बांटते हैं । बच्चों को ईदी में रुपए मिलते हैं ।
महीने के अंतिम दिन चाँद देख कर दूसरे दिन ईद का त्योहार मनाते हैं ।
बच्चों यह त्योहार इंसानियत का पैगाम देता है । सबके प्रति प्रेम - प्यार बांटने का संदेश देता है । अल्लाह भी तभी खुश होता है ,जब हम आपस में वैर -विरोध को त्याग मिलजुलकर रहें । तो मेरे प्यारे बच्चों आप भी अपने मन में भेद भाव न लाना और इंसानियत के रिश्ते को सदैव कायम रखना ।
आप सब को ईद मुबारक देती हूँ ।

मीठा फल ६. ३ .२०१०

मीठा फल

आया मौसम गर्मी का ,
लेकर संग वार्षिक परीक्षा ।
कुह - कुह कर कोयल बोली ,
बच्चों करना खूब पढ़ाई ।

कुकड़ू कु मुर्गा बोला ,
हर सुबह जल्दी उठना ।
सुबह को आती सरस्वती ,
याद होता है खूब जल्दी ।

दौड़ कर शेर भी दहाड़ा ,
पढने में खर्च होती ऊर्जा ।
खाना तुम पौष्टिक खाना ,
न करना तुम कोई बहाना ।

" मंजू " मोर बोला कुहक कर ,
मिलेगा पास का परीक्षाफल ।
नाचेगी ख़ुशी चारों तरफ ,
मिले मेहनत का मीठा फल ।

( वार्षिक परीक्षा की शुभ कामनाओं के साथ )


-मंजू गुप्ता

मोर ६. ४ . २०१०


मोर ६. ४. २०१० 

काले काले बादल छाए ,
धडाधड शोर हैं मचाएँ ,
घनघोर घटाएँ हैं गाएँ ,
मौसम सुहाना है लाए ।

मोर को मौसम भाया रे ,
पंखों को फैलाया रे ,
मोरनी ने गीत गाया रे ,
घूमकर मोर नाचा रे ।

नीले , हरे सुनहरे पंख ,
देखकर बच्चे हुए दंग ,
कितने सुंदर पंख व नाच ,
मन ख़ुशी से नाचा आज ।

सहेली रानी
६.५.२०१० 
सुना रही हूँ एक कहानी ,
मैं बातों - बातों में बताती ।

परी- सी वह शहजादी
था नाम उसका रानी
सबको लगती प्यारी
सहेली मेरी न्यारी ।

सुना रही हूँ एक कहानी ,
मैं बातों - बातों में बताती ।

करती सदा मनमानी
रोटी उसे नहीं भाती
पिजा चाव से खाती
उसे हुई इससे हानि ।

सुना रही हूँ एक कहानी ,
मैं बातों ................... ।
लगी उसे बीमारी
दुखी हुई माँ - नानी
कहना नहीं मानती
खटकती थी मनमानी ।

सुना रही हूँ एक कहानी
मैं बातों ...................... ।
थी माँ - नानी सयानी
रोटी का पिजा बनाती
बड़े चाव से वह खाती
दूर भागी बीमारी ।

सुना रही हूँ एक कहानी
मैं बातों .................. ।





नाव चली

05 जुलाई 2010


नाव चली



नाव चली 



काले बादल नभ में छाए 

ढम -ढम -ढम- ढम शोर मचाए 

देखो सूरज ! भी नजर न आए 

 दिन में भी अँधेरा  छाए ।



मौसम ने भी करवट ली 

सर -सर -सर - सर हवा चली 

रिमझिम -रिमझिम वर्षा हुई 

नदी - नालों में पानी भरे । 



नाव को ले कर बच्चे निकले 

नाव पानी में तैराई रे 

छप - छप -छप -छप नाव चली 

देख इसे सब हर्षाए रे । 



मंजू गुप्ता 




3 जन ने कहा है:

Sunil Kumar ने कहा…
एक अच्छी कविता समय के अनुसार
एक सुंदर रचना , बधाई
Amitraghat ने कहा…
"बहुत बढ़िया..."
Manju Gupta ने कहा…
सुनील जी ,अमितराघट जी ,

मेरा हौसला बढाने के लिए धन्यवाद .
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