त्रिवेणी: सुहानी भोर
sundr chitran bhor ka , maarmik laajvaab sedoko
शनिवार, 1 अगस्त 2015
गुरुवार, 30 जुलाई 2015
सहज साहित्य: यादों के झरोखे में कलाम
सहज साहित्य: यादों
के झरोखे में कलाम
यादों के झरोखे में कलाम
मंजु गुप्ता
'' बने धरती कैसे खुशहाल "
उस पल हुई साँसें बेहाल
कह न पाई अपनी बात
विदा हो गईं ले के कलाम।
गमगीन आँखें दें विदाई
देता देश - विश्व सलामी
देश को समर्पित जिंदगानी
दे श्रद्धांजलि हर भारतवासी।
अभावों - मुश्किलों भरी जिंदगी
परिश्रम - सच्चाई करे बन्दगी
मन तरंगे हालात से खूब लड़ी
छुई उड़ाने परमाणु की कामयाबी की।
विशाल सोच , चिंतन के ध्यानी
थे शिक्षक , आध्यात्मिक ज्ञानी
आदर्शों , अंतस् प्रज्ञा के धनी
' विंग्स ऑफ फायर ' लोकप्रिय बड़ी।
मानवीय पूँजी थी बड़ी भारी
बैंक पूँजी में खाता था खाली
रसीला फलदार वृक्ष सरीखा
विनम्र प्रतिमूर्ति योगदानोंवाली।
बढ़ाया विश्व में ' अग्नि ' ' पृथ्वी ' से मान
मिला ' मिसाइल मैन ' ; भारत रत्न ' खिताब
लक्ष्य ' बीस हजार बीस ' तक का सपना
करना था देश को विकसित अपना।
चढ़ी रहती अथक कामों की धुन
सफलता की समृद्धि सपनों से बुन
किया मेल अध्यात्म - विज्ञान का
जिया जीवन ' गीता ' - ' कुरान ' - सा
बन राष्ट्रपति बाल - जन -युवा में बेमिसाल
नई सोच विज्ञान - चिकित्सा की बनी मिसाल
सभी परम्परा - संस्कृतियों में गए थे घुल
रूढ़ियों - कुरीतियों की तोड़ी अमिट दीवार।
जर्रे - जर्रे को कर गए खुशहाल
' न करना मेरे मरने पे अवकाश
करना देशवासियों दुगना काम '
करेंगी सदा' पीढ़ियाँ उन्हें याद।
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गुरुवार, 20 नवंबर 2014
शादी की साल गिरह आ गई फिर एक बार
सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .
सजे हैं घर , नगर के गलियारे
सजे हैं सोलह श्रृंगार सारे .
लाली सुहाग ने किया करार
खिलेगी सिंदूर से सदा बहार .
शादी की साल गिरह आ गई फिर एक बार
सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .
टीका , बिंदिया पी से हुए निहाल
घटा का काजल इश्क का कहे हाल .
प्रीत गजरा महका रहा खुमार
धड़कनें धड़के ले के पयार
शादी की साल गिरह आ गई फिर एक बार
सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .
लाली लवों की करे लालमलाल
हिना ने रंग दिए दिल लाल लाल .
नग अँगूठी में दिखे पी की मुरत
प्रेम नगर में रंगी आज कुदरत .
खन खन चुड़ियां मिलन का करें शोर
पायल , बिछया पर चले न जोर .
जश्ने इश्क का मंजु हुआ इजहार
दुलारी दुआएँ गाए दिलदार .
सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .
सजे हैं घर , नगर के गलियारे
सजे हैं सोलह श्रृंगार सारे .
लाली सुहाग ने किया करार
खिलेगी सिंदूर से सदा बहार .
शादी की साल गिरह आ गई फिर एक बार
सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .
टीका , बिंदिया पी से हुए निहाल
घटा का काजल इश्क का कहे हाल .
प्रीत गजरा महका रहा खुमार
धड़कनें धड़के ले के पयार
शादी की साल गिरह आ गई फिर एक बार
सजना संग खुशियाँ रहेगी बरकरार .
लाली लवों की करे लालमलाल
हिना ने रंग दिए दिल लाल लाल .
नग अँगूठी में दिखे पी की मुरत
प्रेम नगर में रंगी आज कुदरत .
खन खन चुड़ियां मिलन का करें शोर
पायल , बिछया पर चले न जोर .
जश्ने इश्क का मंजु हुआ इजहार
दुलारी दुआएँ गाए दिलदार .
बुधवार, 13 अगस्त 2014
सोमवार, 28 अप्रैल 2014
दोहों में मजदूर
दोहों में मजदूर
जगत में ' मजदूर दिवस ' , एक मई को होय .
ऑफिसों - फैक्टरियों में , मिले छुट्टी हर कोय .
अनपढ़ हुए तो क्या हुआ , करते परिश्रम खूब .
सर्दी , गर्मी , वर्षा ऋतु में , काम में रहते डूब .
श्रम से ना दम फूलता , आता खूब स्वेद .
दिन - रात परिश्रम करके , भरते अपना पेट .
मानसिक - शारीरिक श्रम, में करे राष्ट्र भेद .
है श्रमिक का कम वेतन , ' मंजू ' होता खेद .
नहीं है सिर ढकने का , स्थल भी उनके पास .
बनाय औरों के लिए , घर , भवन , शहर खास .
न हो अगर संसार में , कोई भी मजदूर .
तो न होते महल - नगर , न ही ' ताज ' - सा नूर .
नहीं मिलती उन्हें इज्जत , न मिले हैं पुरस्कार .
ना ही हैं वस्त्र - आवास , ना आहार - विहार .
तन - मन का गम भुलाने , पिए लेता शराब .
बर्बाद होता परिवार , बेचे जो सरकार .
करते ' बाल - मजदूरी ' , सहते धुआँ - दुर्गंध .
बनाते धूप - अगरबत्ती , करें जग में सुगंध .
दुकान , ढाबा , घरों में , करें हैं बच्चे काम .
बचपन बूढा हो जाय , होय देश बदनाम .
करे जग इनका शोषण , मिलती गाली - मार .
छुट्टी पर काटे पगार , होते जब बीमार .
भटकते हैं इधर -उधर , होय कुसंग शिकार .
माफिया , डाकू बन के , करें हैं बलात्कार .
जीने के लिए करते , हाड़ - तोड़ वे काम .
ना मिलता शिक्षा - इलाज , होते वे लाचार .
बन्धुआ मजदूर बन के , चुकाते हैं लगान .
मानवता का हो रहा ,खुला घोर अपमान .
समस्या के लिए हल हो , ' बन्धुआ मुक्ति अभियान '
पुनर्वास की हो व्यवस्था , बने कठोर विधान .
नैतिकता - राष्ट्र हित में , सरकार होय ध्यान .
दे घर , स्कूल , सुविधाएं , राज्य बढ़ाए हाथ .
शनिवार, 21 सितंबर 2013
नई सुबह की आशीषें
प्यारी लाडली लवली
असीम अपरिमित अनंत प्यार .
पर्वों का पर्वराज वर्षगांठ की सुनहरी पावन तारीख २१ सितबर के स्वर्णिम सुअवसर पर परिवार - समाज जग की ओर से प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष
रूप से जुड़े जन - मन की ओर से हार्दिक बधाई प्रेषित कर रही हूँ .
शब्दों को गूँथ कर उपहार गजल का प्रेषित कर रही हूँ .
नई सुबह की आशीषें
षोडशोपचार गाती नई सुबह आई
पर्व जन्म दिन मनाने माँ - पिता शुचि आई .
स्वागत में नवरंग - रस से शुभ दिन सजा
नभ ने भी आशीषों की झड़ी लगाई .
महके जीवन का पल - पल खुशियों से
रहेगी सदा साथ ममता कई परछाई .
निवाए हाथों से जब खिलाती बचपन
अनुगूँज किलकारियां दूर करे तन्हाई .
नहीं आय ककहरा सिखाती कई बार
बनी डॉक्टर लिए शिक्षा की गहराई .
सुनहरी रश्मियाँ दुआओं के शहर में
ऊँचाइयां उजाले की लेकर आई .
लिए प्रेम रंग चाहत रंगने आया
सिंधु आरजू में चम्पई मुस्कान छाई .
अनुराग को इक दिन बिछडना पड़ता
लिखते - लिखते आँखें आज छलछलाई .
वर्षा रहा ढेर आशीर्वाद हर वरद हस्त
' मंजु ' ' सदा सुखी रहो ' गाए शाहनाई .
अनंत मंगल कामनाओं के साथ -
माँ
गुरुवार, 29 अगस्त 2013
जन्माष्टमी - लीलाधर की महालीलाएं
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामानाएं
लीलाधर की महालीलाएं
१. कृष्ण जन्म पै
जागे जग के भाग्य
करूँ कामना .
२. जन्माष्टमी पै
हर घर - विश्व में
गूंजी बधाई .
३. प्रेम मंदिर
में आस्था का उमड़ा
जन सैलाब .
४. कृष्ण प्रेम में
वर्ण , धर्म , नस्ल की
सीमाएं टूटी .
५. देश - विदेश
कान्हा रंग में रंगे
जन्मोत्सव पै .
६. कारा में कृष्ण
तोड़ी जुल्मी बेडियाँ
चमत्कार से .
७. कान्हा पग छु
यमुना ने दी राह
वासुदेवको .
८. छली पूतना
ने जान थी गवाईं
कृष्ण लीला से
९. सुदामा पग
कान्हा आंसुओं से धो
मैत्री थी गूंजी .
१० . वंशीधर से
मांगा अधरामृत
हर गोपी ने
११. प्रेम वेदी पै
किया था आत्मदाह
सारी गोपी ने .
१२ दिव्य दृष्टि से
अंतर घर गईं
प्रेमी गोपियाँ .
१३. गोकुलधाम
में रची बाल लीला
घनश्याम ने .
१४. श्याम लीला से
अधर्म पै धर्म का
झंडा फहरा .
१५ . अनोखे रास
गोपियों से करके
दिलों को जोड़ा .
१६ . प्रेम - भक्ति से
कान्हा हुए वैश्विक
अनंत हो के .
१७ . आतंकी कंस
की चालों का मर्दन
किया खेल में .
१८ . कृष्ण नकेल
से कालिया से मुक्त
हुई यमुना .
१९ . महाराष्ट्र में
दही कालाउत्सव
की मची धूम .
२० . बनाने आए
पिरामिड कान्हा का
विदेशी टोली .
२१ . चितचोर की
मधुर तानों पर
नाचे गोपियाँ .
२२ . कृष्ण शिक्षा से
पट उर के खुलें
होए उद्धार .
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pushpa mehra.
~सादर
अनिता ललित
अनिता ललित , अनिता ji , Subhash ji , Digvijay ji , vraishth kvytri Pushpa ji aabhar .