बुधवार, 31 जुलाई 2013

मोर ६. ४ . २०१०


मोर ६. ४. २०१० 

काले काले बादल छाए ,
धडाधड शोर हैं मचाएँ ,
घनघोर घटाएँ हैं गाएँ ,
मौसम सुहाना है लाए ।

मोर को मौसम भाया रे ,
पंखों को फैलाया रे ,
मोरनी ने गीत गाया रे ,
घूमकर मोर नाचा रे ।

नीले , हरे सुनहरे पंख ,
देखकर बच्चे हुए दंग ,
कितने सुंदर पंख व नाच ,
मन ख़ुशी से नाचा आज ।

सहेली रानी
६.५.२०१० 
सुना रही हूँ एक कहानी ,
मैं बातों - बातों में बताती ।

परी- सी वह शहजादी
था नाम उसका रानी
सबको लगती प्यारी
सहेली मेरी न्यारी ।

सुना रही हूँ एक कहानी ,
मैं बातों - बातों में बताती ।

करती सदा मनमानी
रोटी उसे नहीं भाती
पिजा चाव से खाती
उसे हुई इससे हानि ।

सुना रही हूँ एक कहानी ,
मैं बातों ................... ।
लगी उसे बीमारी
दुखी हुई माँ - नानी
कहना नहीं मानती
खटकती थी मनमानी ।

सुना रही हूँ एक कहानी
मैं बातों ...................... ।
थी माँ - नानी सयानी
रोटी का पिजा बनाती
बड़े चाव से वह खाती
दूर भागी बीमारी ।

सुना रही हूँ एक कहानी
मैं बातों .................. ।





नाव चली

05 जुलाई 2010


नाव चली



नाव चली 



काले बादल नभ में छाए 

ढम -ढम -ढम- ढम शोर मचाए 

देखो सूरज ! भी नजर न आए 

 दिन में भी अँधेरा  छाए ।



मौसम ने भी करवट ली 

सर -सर -सर - सर हवा चली 

रिमझिम -रिमझिम वर्षा हुई 

नदी - नालों में पानी भरे । 



नाव को ले कर बच्चे निकले 

नाव पानी में तैराई रे 

छप - छप -छप -छप नाव चली 

देख इसे सब हर्षाए रे । 



- मंजू गुप्ता 




3 जन ने कहा है:

Sunil Kumar ने कहा…
एक अच्छी कविता समय के अनुसार
एक सुंदर रचना , बधाई
Amitraghat ने कहा…
"बहुत बढ़िया..."
Manju Gupta ने कहा…
सुनील जी ,अमितराघट जी ,

मेरा हौसला बढाने के लिए धन्यवाद .
- See more at: http://nanhaman.blogspot.in/2010/07/blog-post_05.html#comment-form

प्रहरी

प्यारे बच्चो , आपको और सभी भारतवासियों को आजादी की हार्दिक बधाई और शुभ-काम्नायें । स्वतंत्रता दिवस पर पढिए देश भक्ति की रचनाएं यहां ......

05 अगस्त 2010


prhri

प्रहरी 

जांबाजों को समर्पित ----------



सीमा के हम प्रहरी हैं 

नजरें हमारी गहरी हैं 

दिन - रात बन हम डटे हुए

जान हथेली पर रखे हुए ।



सीमा के --------------- -- 

दुश्मन अगर आ भी जाए 

छक्के उसके हम छुड़ा देंगे 

वह हम से बच न पाएगा 

अँगुलियाँ चक्र बन जाएँ ।



सीमा के ------------------- 

जन्म हमारा माँ के लिए 

देश पर आंच न आने दूँ 

हम हैं तेरी रक्षा के लिए 

प्रहरी बन हम खड़े हुए ।



सीमा के ------------------

आठ प्रहर हम पहरा बने 

दुश्मन अगर आँखें दिखाए

हम उसको हैं मार गिराएं 

सीमा पर हम सीमा बने । 



सीमा के -------------------



तिरंगे को दी है जुबान 

अगर हो जाऊं मैं कुर्बान 

पुनर्जन्म लूंगा तेरे पास 

फहराऊंगा तिरंगा हर बार ।

सीमा के ----------------------



- मंजू गुप्ता 






4 जन ने कहा है:

Chinmayee ने कहा…
बहुत अच्छा ! प्रहरी यो को टीवी पर देखकर अक्सर मै उनके जैसे चलती हू!
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…
मुझको यह रचना रुची.
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…
मुझको यह रचना रुची.
Manju Gupta ने कहा…
चिन्मयी जी ,आचार्य जी रचना पसंद आने के लिए आभार .
- See more at: http://nanhaman.blogspot.in/2010/08/prhri.html#comment-form

आत्म अवलोकन - सदाचार की दिवाली

06 नवम्बर 2010


आत्म अवलोकन - सदाचार की दिवाली

आत्म अवलोकन - सदाचार की दिवाली 

कार्तिक का सुहाना महीना आया 
हेमंत ऋतु संग दिवाली लाया 
पर्व पांच दिनों का खुशियाँ लाया 
स्कूलों - कालेजों की छुट्टियां लाया ।

नए साल में ओबामा भारत आया 
दिवाली -सा मानव को जोड़ने आया 
स्वागत में बन्दनवारे हैं बंधी 
रंगोली - चौक से देहरी है सजी ।

घर -गाँव -नगर की हुई सफाई 
कंदीलों -दीयों की रौशनी जगमगाई 
सदाचार की रौशनी में रात नहाई 
जन - मन ने गणेश - लक्ष्मी की पूजा करवाई .

ऊर्जा - उत्साह - उमंग की तरंगें नाची 
पटाखे , अनार , चकरी की बहार आई 
स्फुल्लिंग - सी सहस्त्रधार है नहाई 
खिलौने , खील , बताशे , मिठाई छाई .

' मंजू 'आत्म अवलोकन की बारी आई 
सब कुछ होता नया - नया हर दिवाली 
नया नहीं हो पाता है मन बेचारा 
आत्म ज्योति जगाकर बने धनभागी ।

दीपावली की शुभ कामनाओं के साथ -
-मंजू गुप्ता ,
वाशी , नवी मुम्बई .



13 जन ने कहा है:

अशोक बजाज ने कहा…
'असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय ' यानी कि असत्य की ओर नहीं सत्‍य की ओर, अंधकार नहीं प्रकाश की ओर, मृत्यु नहीं अमृतत्व की ओर बढ़ो ।

दीप-पर्व की आपको ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं ! आपका - अशोक बजाज रायपुर

ग्राम-चौपाल में आपका स्वागत है
http://www.ashokbajaj.com/2010/11/blog-post_06.html
डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…
बहुत सुन्दर..... दीप-पर्व की शुभकामनाएं..
केवल राम ने कहा…
बहुत खूब ...सम्यक सन्दर्भों
को प्रस्तुत करती कविता ...शुक्रिया
चैतन्य शर्मा ने कहा…
हैप्पी दिवाली :)
Manju Gupta ने कहा…
अशोक जी ,मोनिका जी ,केवल जी और चैतन्य जी ,
स्नेहिल स्नेह .

आपके मनोभाव मेरे उत्साह को सम्बल देते हैं . भैया दौज की शुभ कामनाओं के साथ -
मंजू गुप्ता
माधव( Madhav) ने कहा…
विचारणीय पोस्ट् दीप-पर्व की शुभकामनाएं.
Manju Gupta ने कहा…
माधव जी हौसला बढाने के लिए आभार
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
--
आपकी पोस्ट की चर्चा बाल चर्चा मंच पर भी
की गयी है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/11/28.html
ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…
कल कल करती हुए बहती नदी सी अच्छी कविता लगी !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ
Manju Gupta ने कहा…
आदरणीय शास्त्री जी , ज्ञानचंद जी ,
नमस्ते .
आपके मनोभाव मेरे मनोबल को प्रवाहमान करते हैं .आभार और छठ पर्व की हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ -
मंजू
रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…
----------------------------------------------------------
दुनिया के सभी बच्चों को
मेरी तरफ से बहुत-बहुत प्यार!

----------------------------------------------------------
Manju Gupta ने कहा…
आया नेहरु जी का जन्म दिन
प्यारा - सा बच्चों का है दिन .

मन तो नन्हा है
हाँ !नन्हा मन है .

दे उन्हें हर खुशी हर दिन
बड़े रहें 'मंजू ' संग हर दिन .
जग के सभी बच्चो को असीम स्नेह , प्यार ,वात्सल्य ,

शुभकामनाओं के साथ -

मंजू गुप्ता ,
वाशी , नवी मुम्बई .
Harman ने कहा…
bahut hi badiya laga pad kar..

mere blog par bhi sawagat hai..
Lyrics Mantra
thankyou
- See more at: http://nanhaman.blogspot.in/2010/11/blog-post.html#sthash.XHH70XSE.dpuf

खेलो की राजधानी

05 अक्तूबर 2010


खेलो की राजधानी

खेलों की राजधानी 



राष्ट्रकुल खेलों की धूम मची 



दुल्हन बन राजधानी है सजी 



प्रतियोगियों में होड़ है लगी 



वंदना में आरती है सजी । 



मुस्कान से भरा हुआ है शेरा 



साहस ,शक्ति , शौर्य , शेर - सा 



खिलाड़ियों का लगा है मेला 



जश्न , जोश , जीत की झड़ी है लगी । 





चुनौतियों से मंजिल है भरी 



प्रयास से सफलता मिलती 



स्वर्ण , रजत , कांस्य पदकों से 



जीत को ' मंजू ' ख़ुशी है मिलती । 



- मंजू गुप्ता , 



वाशी , नवी मुंबई । 


7 जन ने कहा है:

चैतन्य शर्मा ने कहा…
अरे वाह अपने तो हमारे देश में हो रहे खेलों को लेकर

कितनी सुंदर कविता बनाई..... मुझे तो बहुत ही अच्छी लगी
Manju Gupta ने कहा…
भाई चैतन्य जी ,
नमस्ते .

मेरा हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद .
रानीविशाल ने कहा…
बहुत सुन्दर कविता लिखी है आपने .......आभार
नन्ही ब्लॉगर
अनुष्का
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…
सुन्दर बाल कविता के लिए
मंजू गुप्ता जी को बधाई!
--
आपकी इस पोस्ट की चर्चा
बाल चर्चा मंच पर भी की गई है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/21.html
Manju Gupta ने कहा…
आदरणीय गुरूजी मयंक जी ,
सादर नमस्ते .

आप के प्रेषित विचार मेरे लिए अनमोल हैं . धन्यवाद .
बाल चर्चा मंच से मुझे अवगत कराएं .मुझे इसकी जानकारी नहीं है .
प्रिय नन्ही -सी रानी .
असीम स्नेह .
आप के मनोभाव पढकर मेरी मुस्कान दुगनी हो गई .आभार .
माधव( Madhav) ने कहा…
लेट्स गो , जियो.. , उठो.., बढ़ो... , जीतो....
Manju Gupta ने कहा…
माधव जी ,
नमस्ते .
खेलों के लिए प्रेरणात्मक संदेश दिया ,आभार .
- See more at: http://nanhaman.blogspot.in/2010/10/blog-post_05.html#comment-form

शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

वर्षगांठ पांच फरवरी

आदरणीया स्नेह दीदी ,

स्नेहिल नमस्ते .

 पर्वराज   वर्षगांठ ' ५ फरवरी ' के   महान , पावन दिवस पर हम सब की मंगल - हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार करें .
  
आपको गजल का नजराना नजर  कर रही हूँ -


शहर - शहर में हो रहा गुणगान 
मौसम ' पांच फरवरी ' का हुआ जवान . 

वर्षगांठ की भोर ने मचाया शोर 
खुशियों की महफिलों में गूंजी तान .

स्वस्थ , सुखी , दीघार्यु हो बहन मेरी 
जमाने की दुआएँ चढ़ी परवान .

चमन बहारों का सदा महकता रहें 
दिल की बस्ती के पूरे हों अरमान .

मुबारकबाद ले आईं  नजराना 
कमल - सी खिलती रहे जीवन  मुस्कान .

प्राणों की धारा बन बहती मुझ मैं 
तुम्हारी आशिकी में ' मंजु ' कुरबान .

मंजु सपरिवार .